Monthly Archives: दिसम्बर 2011

परिग्रह

इन्सान बचपन से लेकर बुढापा आने तक परिग्रह करता ही रहतां हैं । बचपनमें जितने खिल्लोने मिलते हैं बहुत ही कम से खेलता है, बाकी पडे रहते हैं ,फिर नये आते हैं । बचपनसे ही परिग्रहकी शुरूआत होती हैं । … पढना जारी रखे

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स्वार्थ

अनेक लोग जिवनमें मिलते है , आप सभीको संतोष नही दे पाते। जो कोई भी आपको मिलता हैं चाहे आपके घर्के लोग हो यातो बाहरके लोग । हंमेशा एक प्रकारका व्यवहार आप नहीं कर पाते । संजोग और आपका मूड दोनो … पढना जारी रखे

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समय के अनुसार चलों ।

समय आज् बदल रहा हैं । रहन सहन और पहनावें में भारी बदलाव आ चूका है और आ रहा हैं ।धोती कुर्ता और पाजामा की जगह जीन्स पेन्ट आ चुके हैं । खानेमें चावल रोटीकी जगह बरगर आ चूके हैं … पढना जारी रखे

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अभिप्राय

जीवनमें इन्सानको हर व्यक्ति विषेष से कुछ न कुछ अभिप्राय होते हैं । कुछ अच्छे कुछ बुरे। इन्ही अभिप्रायके माध्यमसे ,इन्सान हमे पसंद होता हैं ,और नापसंद होता हैं। अगर हम किसीके प्रति जो अभिप्राय बांधते हैं,वही हमारी गलती हैं … पढना जारी रखे

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MY HINDI BLOG

Hi .my blog vasant ujas ia my first hindi blog. i want to write what i feel .I want to write what people think . keep blogging ….

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