परिग्रह

इन्सान बचपन से लेकर बुढापा आने तक परिग्रह करता ही रहतां हैं । बचपनमें जितने खिल्लोने मिलते हैं बहुत ही कम से खेलता है, बाकी पडे रहते हैं ,फिर नये आते हैं । बचपनसे ही परिग्रहकी शुरूआत होती हैं । जवानीमें कीतने कपडे इक्क्ठा करते  हैं  हैं खुद को पता नही होता। पूरी जिन्दगी सामान  बटोरता रहता हैं । भारतीय समाजकोआदत पड चूकी हैं सामान जमा करनेकी।हर घरमें जाकर देखे तो ८०% सामान मात्र अलमारीके लिये होता हैं । कुछ सामान मात्र एक जनरेशन से दूसरी जनरेशनको मात्र देनेके लिए होता हैं । जरा सोचे हम ऐसा करने पर मजबूर क्यों हैं ।जो सामान हम पूरी जीन्दगी उपयोग नही करते उसे जमा क्यों करते हैं।कुछ सामान सलोसाल पडा रहता हैं,कुछ सामान मात्र कुछ लोगोके आने पर उपयोग में आता हैं । किमती सामान खरिदते रहते हैं पर उपयोग नही करते।कुछ सामान सिर्फ देखने के लिए रखते हैं। महेंगी चीजे खरीदते हैं कुछ विषेष लोगो के लिये जो जीवन में बहुत ही कम आते हैं । कुछ सामान ऐसा है जिसे वाकईमें फेकना होता है, पर हम उसेभी घर में सम्भाल के रखते हैं ,उेदाहरणके तौर पर नया टेलिविजन खरिदते हैं पूराना एक कोने में पडा रखते है ,बेचनेमें समय व्यतित करते हैं । कभी क्भी ऐसी चीजे सालो साल पडी रहती हैं ,पर भारतीय मन किसीको मुफ्तमें दे नही शकता । पूरानी चीजों से थोडी कमाई होगी करके संभालते हैं ।
अपने ही घरमें नजर दौडाए कितना सामान आप उपयोग में लाते हो ? हीसाब लगाईए कितना पौसा उनके पीछे लगता हैं । अगर पही पैसा आप भचाके रखते तो काफी काम आ शकता है। पूरी जीन्दगी ईकठ्ठा करने में बीतबी है। चाहे चिजे  हो ,चाहे प्रोपर्टी हो चाहे गहने हो या फालतू चीजो का अंबार।
साथमें कुछ नही आता । अगर कीसिको मुफ्तमें कुछ दीया हो तो लेने वाले के अंतर मन से जो दुवा निकलती है वही हमारे साथ जाती हैं। अंतमें हम चते जाते है, चिज वस्तुं रह जाती हैं । जो चिजे हमने अपने कमाई से खरीदी होती है, अपनी जान की तरह सालो साल संभालके रखी होती है हमारे जानेके बाद पीछे के लोग (अपने ही बच्चे) उसे आराम से फेक देते है। साथ मे कहते भी है कि पिताजीको कुछ समझ नही ,बेकारका सामान जमा करके हमारे लिये छोडा है।
अंत तक यह चीजे हमारा पिछा नही छोडती । समज लेना चाहीए जो चीज वस्तुं हमारे लिए कामकी हो नयी जनरेशन वालो के लिए बिलकुल व्यर्थ हो । आपने उन चीजो के खरीदने में इतना पैसा व्यय किया हो कि आप अपनी मर्जी से अपनी इच्छा पूर्तीभी नही कर पाये हो , सोचो इसके बदले आप हवाइजहाज की मुसाफरी कर शकते थे, कोइ फोरेन टूर का ख्वाबभी पूरा कर शकते थे, अपने आत्माके कल्याणके लिए यात्रा कर शक्ते थे, अपने आनंद के लिये जो चाहे कर शकते थे । पर आपने ऐसा नही किया । आपको मालूम नही आपकी अर्थी उठनेके बाद  आपके सामान को उठानेकी बारी है।

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