Monthly Archives: जुलाई 2015

सुनोतो !!

कुछतो कह्नेका मन हैं ।  राजनितिपे रोनेका मन है।  हमभी देशवासी है। देशके लिये कुछ करेनेका हक्क है। जो चल रहाहै देशमें देख नही पाते हैं । मन मचलताहें जब सो नही पाते हैं । कोने कोनेसे खबरोंकी बहार आती … पढना जारी रखे

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जीवनके रंग

जीवनके विविध रंग है। रंगोको किस प्रकारसे हम जीवन में भरते है वह मह्तव्पूर्ण है। अकसर हम दूसरोके चित्र के रंगोको देखते है और गलतियां कर जाते है। परीणाम स्वरुप हम अपने चित्रको देखना ही छोड देते है । दूसरोके … पढना जारी रखे

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