सुनोतो !!

कुछतो कह्नेका मन हैं ।  राजनितिपे रोनेका मन है।  हमभी देशवासी है। देशके लिये कुछ करेनेका हक्क है। जो चल रहाहै देशमें देख नही पाते हैं । मन मचलताहें जब सो नही पाते हैं ।
कोने कोनेसे खबरोंकी बहार आती है ं ईन्सान शर्मसे जुक जाऍ ऐसी बात आती है।
हम सुनतें रहतें है, समाचर पत्रके पन्नोसे हमे घीन्न आती हैं
आदमी बदल गया हैं, कहताहै जमाना बदल गया है।

कुछ करनेवाले लोग है जरुर मगर कुछ भी नही कर पातेहै।
अहंकारका अडंगा लगा देते हैं।और कहते है हमे देशकी फिक्र है।
चौक जाओ जनता ,आपको हमारी बिनति है।
आजादीके बाद भी गुलामी की ही बारी है।

समझजाओ सुधरजाओ अपना हित पहचानो दोस्तो ।
अपनी आखोंसे दुनिया देखो ,अपने दिलसे देशको समजो ।
राजनिति के दंगलमें बह न जाओ ,अपना किनारा आपही ढूण्ढो।
बात हमारी समजन आये तो माफ करो पर अपने अंदर गोर करो \
जयहिन्द ।

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यह प्रविष्टि मनकी बात में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

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