Tag Archives: समजने जैसी बात !!!

परिग्रह

इन्सान बचपन से लेकर बुढापा आने तक परिग्रह करता ही रहतां हैं । बचपनमें जितने खिल्लोने मिलते हैं बहुत ही कम से खेलता है, बाकी पडे रहते हैं ,फिर नये आते हैं । बचपनसे ही परिग्रहकी शुरूआत होती हैं । … पढना जारी रखे

Rate this:

मनकी बात में प्रकाशित किया गया | Tagged , | टिप्पणी करे

अभिप्राय

जीवनमें इन्सानको हर व्यक्ति विषेष से कुछ न कुछ अभिप्राय होते हैं । कुछ अच्छे कुछ बुरे। इन्ही अभिप्रायके माध्यमसे ,इन्सान हमे पसंद होता हैं ,और नापसंद होता हैं। अगर हम किसीके प्रति जो अभिप्राय बांधते हैं,वही हमारी गलती हैं … पढना जारी रखे

Rate this:

मनकी बात में प्रकाशित किया गया | Tagged | 1 टिप्पणी